LIVE UPDATE
झमाझम खबरें

मुख्यमंत्री निवास में हरेली उत्सव: छत्तीसगढ़ी परंपराओं की झलक, पारंपरिक कृषि यंत्रों के साथ बिखरी सांस्कृतिक छटा

मुख्यमंत्री निवास में हरेली उत्सव: छत्तीसगढ़ी परंपराओं की झलक, पारंपरिक कृषि यंत्रों के साथ बिखरी सांस्कृतिक छटा

 

ये खबर भी पढ़ें…
राशन घोटाले के आरोपों पर प्रशासन का बड़ा एक्शन! फिंगरप्रिंट लेकर राशन हड़पने की शिकायत, विक्रेता ने अनियमितता मानी; दुकान निलंबन का प्रस्ताव
राशन घोटाले के आरोपों पर प्रशासन का बड़ा एक्शन! फिंगरप्रिंट लेकर राशन हड़पने की शिकायत, विक्रेता ने अनियमितता मानी; दुकान निलंबन का प्रस्ताव
August 9, 2026
राशन घोटाले के आरोपों पर प्रशासन का बड़ा एक्शन! फिंगरप्रिंट लेकर राशन हड़पने की शिकायत, विक्रेता ने अनियमितता मानी; दुकान...
Plugin developed by ProSEOBlogger. Get free gpl themes.

रायपुर, 24 जुलाई 2025/छत्तीसगढ़ी लोकजीवन की खुशबू लिए हरेली तिहार का पारंपरिक उत्सव आज मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के निवास में विधिवत रूप से आरंभ हुआ। छत्तीसगढ़ एक ऐसा प्रदेश है, जहाँ प्रत्येक अवसर और कार्य के लिए विशेष प्रकार के पारंपरिक उपकरणों एवं वस्तुओं का उपयोग होता आया है। हरेली पर्व के अवसर पर मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में ऐसे ही पारंपरिक कृषि यंत्रों एवं परिधानों की झलक देखने को मिली, जो छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की अमूल्य धरोहर हैं।

*काठा*

ये खबर भी पढ़ें…
बैगा आवासीय विद्यालय धनौली में हुआ पालक-बालक सम्मेलन एवं न्योता भोज, जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने की सहभागिता
बैगा आवासीय विद्यालय धनौली में हुआ पालक-बालक सम्मेलन एवं न्योता भोज, जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने की सहभागिता
August 9, 2026
बैगा आवासीय विद्यालय धनौली में हुआ पालक-बालक सम्मेलन एवं न्योता भोज, जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने की सहभागिता गौरेला। पवन पैकरा...
Plugin developed by ProSEOBlogger. Get free gpl themes.

सबसे बाईं ओर दो गोलनुमा लकड़ी की संरचनाएँ रखी गई थीं, जिन्हें ‘काठा’ कहा जाता है। पुराने समय में जब गाँवों में धान तौलने के लिए काँटा-बाँट प्रचलन में नहीं था, तब काठा से ही धान मापा जाता था। सामान्यतः एक काठा में लगभग चार किलो धान आता है। काठा से ही धान नाप कर मजदूरी के रूप में भुगतान किया जाता था।

*खुमरी*

ये खबर भी पढ़ें…
“12 अगस्त को हर विद्यार्थी लगाए एक पौधा, पर्यावरण संरक्षण में निभाएं जिम्मेदारी”- रजनीश तिवारी
“12 अगस्त को हर विद्यार्थी लगाए एक पौधा, पर्यावरण संरक्षण में निभाएं जिम्मेदारी”- रजनीश तिवारी
August 10, 2026
हरियाली अमावस्या पर 12 अगस्त को होगा ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान, जिलेभर में पौधरोपण का संदेश [video width="832"...
Plugin developed by ProSEOBlogger. Get free gpl themes.

सिर को धूप और वर्षा से बचाने हेतु बांस की पतली खपच्चियों से बनी, गुलाबी रंग में रंगी और कौड़ियों से सजी एक घेरेदार संरचना ‘खुमरी’ कहलाती है। यह प्रायः गाय चराने वाले चरवाहों द्वारा सिर पर धारण की जाती है। पूर्वकाल में चरवाहे अपने साथ ‘कमरा’ (रेनकोट) और खुमरी लेकर पशु चराने निकलते थे। ‘कमरा’ जूट के रेशे से बना एक मोटा ब्लैंकेट जैसा वस्त्र होता था, जो वर्षा से बचाव के लिए प्रयुक्त होता था।

*कांसी की डोरी

यह डोरी ‘कांसी’ नामक पौधे के तने से बनाई जाती है। पहले इसे चारपाई या खटिया बुनने के लिए ‘निवार’ के रूप में प्रयोग किया जाता था। डोरी बनाने की प्रक्रिया को ‘डोरी आंटना’ कहा जाता है। वर्षा ऋतु के प्रारंभ में खेतों की मेड़ों पर कांसी पौधे उग आते हैं, जिनके तनों को काटकर डोरी बनाई जाती है। यह डोरी वर्षों तक चलने वाली मजबूत बुनाई के लिए उपयोगी होती है।

*झांपी*

ढक्कन युक्त, लकड़ी की गोलनुमा बड़ी संरचना ‘झांपी’ कहलाती है। यह प्राचीन समय में छत्तीसगढ़ में बैग या पेटी के विकल्प के रूप में प्रयुक्त होती थी। विशेष रूप से विवाह समारोहों में बारात के दौरान दूल्हे के वस्त्र, श्रृंगार सामग्री, पकवान आदि रखने के लिए इसका उपयोग किया जाता था। यह बांस की लकड़ी से निर्मित एक मजबूत संरचना होती है, जो कई वर्षों तक सुरक्षित बनी रहती है।

कलारी

बांस के डंडे के छोर पर लोहे का नुकीला हुक लगाकर ‘कलारी’ तैयार की जाती है। इसका उपयोग धान मिंजाई के समय धान को उलटने-पलटने के लिए किया जाता है।

Back to top button
error: Content is protected !!