LIVE UPDATE
झमाझम खबरें

मुख्यमंत्री निवास में हरेली उत्सव: छत्तीसगढ़ी परंपराओं की झलक, पारंपरिक कृषि यंत्रों के साथ बिखरी सांस्कृतिक छटा

मुख्यमंत्री निवास में हरेली उत्सव: छत्तीसगढ़ी परंपराओं की झलक, पारंपरिक कृषि यंत्रों के साथ बिखरी सांस्कृतिक छटा

 

ये खबर भी पढ़ें…
जीगौरेला पेंड्रा मरवाही_में शिक्षा व्यवस्था का बुरा हाल- न तो स्कूलों में शिक्षक, न छात्रावासों में जिम्मेदारी—फिर भी वेतन हो रहे जारी
जीगौरेला पेंड्रा मरवाही_में शिक्षा व्यवस्था का बुरा हाल- न तो स्कूलों में शिक्षक, न छात्रावासों में जिम्मेदारी—फिर भी वेतन हो रहे जारी
April 24, 2026
जिले में शिक्षा व्यवस्था का बुरा हाल- न तो स्कूलों में शिक्षक, न छात्रावासों में जिम्मेदारी—फिर भी वेतन हो रहे...
Plugin developed by ProSEOBlogger. Get free gpl themes.

रायपुर, 24 जुलाई 2025/छत्तीसगढ़ी लोकजीवन की खुशबू लिए हरेली तिहार का पारंपरिक उत्सव आज मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के निवास में विधिवत रूप से आरंभ हुआ। छत्तीसगढ़ एक ऐसा प्रदेश है, जहाँ प्रत्येक अवसर और कार्य के लिए विशेष प्रकार के पारंपरिक उपकरणों एवं वस्तुओं का उपयोग होता आया है। हरेली पर्व के अवसर पर मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में ऐसे ही पारंपरिक कृषि यंत्रों एवं परिधानों की झलक देखने को मिली, जो छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की अमूल्य धरोहर हैं।

*काठा*

ये खबर भी पढ़ें…
नोटिस का झुनझुना या भ्रष्टाचार का नया फंडा.? केंदा स्कूल कांड में DEO विजय टांडे की संदिग्ध खामोशी और ‘मंत्रालय’ के नाम पर दोषियों को बचा रहे.?
नोटिस का झुनझुना या भ्रष्टाचार का नया फंडा.? केंदा स्कूल कांड में DEO विजय टांडे की संदिग्ध खामोशी और ‘मंत्रालय’ के नाम पर दोषियों को बचा रहे.?
April 24, 2026
जीशान अंसारी की रिपोर्ट, बिलासपुर/कोटा : छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में शिक्षा विभाग ने शायद 'टाइम मशीन' का अविष्कार कर ली...
Plugin developed by ProSEOBlogger. Get free gpl themes.

सबसे बाईं ओर दो गोलनुमा लकड़ी की संरचनाएँ रखी गई थीं, जिन्हें ‘काठा’ कहा जाता है। पुराने समय में जब गाँवों में धान तौलने के लिए काँटा-बाँट प्रचलन में नहीं था, तब काठा से ही धान मापा जाता था। सामान्यतः एक काठा में लगभग चार किलो धान आता है। काठा से ही धान नाप कर मजदूरी के रूप में भुगतान किया जाता था।

*खुमरी*

ये खबर भी पढ़ें…
53.44 लाख की 2 KM सड़क बनते ही उखड़ी! PMGSY में खुला भ्रष्टाचार? जिम्मेदार मौन”
53.44 लाख की 2 KM सड़क बनते ही उखड़ी! PMGSY में खुला भ्रष्टाचार? जिम्मेदार मौन”
April 25, 2026
“53.44 लाख की 2 KM सड़क बनते ही उखड़ी! PMGSY में खुला भ्रष्टाचार? जिम्मेदार मौन” गौरेला पेंड्रा मरवाही - प्रधानमंत्री...
Plugin developed by ProSEOBlogger. Get free gpl themes.

सिर को धूप और वर्षा से बचाने हेतु बांस की पतली खपच्चियों से बनी, गुलाबी रंग में रंगी और कौड़ियों से सजी एक घेरेदार संरचना ‘खुमरी’ कहलाती है। यह प्रायः गाय चराने वाले चरवाहों द्वारा सिर पर धारण की जाती है। पूर्वकाल में चरवाहे अपने साथ ‘कमरा’ (रेनकोट) और खुमरी लेकर पशु चराने निकलते थे। ‘कमरा’ जूट के रेशे से बना एक मोटा ब्लैंकेट जैसा वस्त्र होता था, जो वर्षा से बचाव के लिए प्रयुक्त होता था।

*कांसी की डोरी

यह डोरी ‘कांसी’ नामक पौधे के तने से बनाई जाती है। पहले इसे चारपाई या खटिया बुनने के लिए ‘निवार’ के रूप में प्रयोग किया जाता था। डोरी बनाने की प्रक्रिया को ‘डोरी आंटना’ कहा जाता है। वर्षा ऋतु के प्रारंभ में खेतों की मेड़ों पर कांसी पौधे उग आते हैं, जिनके तनों को काटकर डोरी बनाई जाती है। यह डोरी वर्षों तक चलने वाली मजबूत बुनाई के लिए उपयोगी होती है।

*झांपी*

ढक्कन युक्त, लकड़ी की गोलनुमा बड़ी संरचना ‘झांपी’ कहलाती है। यह प्राचीन समय में छत्तीसगढ़ में बैग या पेटी के विकल्प के रूप में प्रयुक्त होती थी। विशेष रूप से विवाह समारोहों में बारात के दौरान दूल्हे के वस्त्र, श्रृंगार सामग्री, पकवान आदि रखने के लिए इसका उपयोग किया जाता था। यह बांस की लकड़ी से निर्मित एक मजबूत संरचना होती है, जो कई वर्षों तक सुरक्षित बनी रहती है।

कलारी

बांस के डंडे के छोर पर लोहे का नुकीला हुक लगाकर ‘कलारी’ तैयार की जाती है। इसका उपयोग धान मिंजाई के समय धान को उलटने-पलटने के लिए किया जाता है।

Back to top button
error: Content is protected !!